2011 में बंगाल ने परिवर्तन के लिए वोट दिया और वाम मोर्चे के 34 साल के शासन को ख़त्म किया। पंद्रह साल बाद, 4 मई 2026 को बंगाल ने फिर परिवर्तन चुना। भाजपा ने 294 में से 208 सीटें जीतीं, ममता बनर्जी भवानीपुर में अपनी सीट हार गईं, और शुभेंदु अधिकारी बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बने।
दूसरा परिवर्तन इन्हीं दो तारीख़ों के बीच की कहानी है। यह अदालती आदेशों, जाँच एजेंसियों की कार्रवाई, चुनाव नतीजों और प्रतिष्ठित समाचार रिपोर्टों पर आधारित है, अफ़वाहों पर नहीं।
किताब में क्या है:
• तृणमूल सत्ता में कैसे आई: सिंगूर, नंदीग्राम और 2011 के वादे
• घोटाले: शारदा, नारदा और स्कूल नौकरी मामला, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने 25,753 नियुक्तियाँ रद्द करने का फ़ैसला बरक़रार रखा
• डर के साये में चुनाव: 2018, 2021 और 2023
• संदेशखाली और आरजी कर मामला
• अर्थव्यवस्था: कर्ज़, रोज़गार और पलायन
• तृणमूल अपने काम के बारे में क्या कहती है: कन्याश्री, लक्ष्मीर भंडार, स्वास्थ्य साथी
• 2026 का जनादेश और बंगाल ने मन क्यों बदला
• नई सरकार के पहले फ़ैसले और पहले 100 दिन
• नई सरकार के सामने खुले सवाल
• 15 साल की समयरेखा, नागरिक स्कोरकार्ड और पूरे स्रोत
निष्पक्ष और तथ्यपरक: किताब गिरफ़्तार और दोषी में साफ़ फ़र्क़ करती है, और जहाँ लागू हो वहाँ तृणमूल का पक्ष भी रखती है। फ़ैसला आपका।
तथ्य अक्टूबर 2026 तक के हैं।





